2021-08-30T17:50:33
_*प्रेम का सागर लिखूं*!_ _*या चेतना का चिंतन लिखूं*!_ _*प्रीति की गागर लिखूं*, _ _*या आत्मा का मंथन लिखूं*!_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित*, _ _*चाहे जितना लिखूं*..._ _*ज्ञानियों का गुंथन लिखूं*, _ _*या गाय का ग्वाला लिखूं*..._ _*कंस के लिए विष लिखूं*, _ _*या भक्तों का अमृत प्याला लिखूं*।_ _*रहोगे तुम फिर भी*_ _*अपरिभाषित चाहे जितना लिखूं*..._ _*पृथ्वी का मानव लिखूं*, _ _*या निर्लिप्त योगेश्वर लिखूं*।_ _*चेतना चिंतक लिखूं*, _ _*या संतृप्त देवेश्वर लिखूं*।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूं*..._ _*जेल में जन्मा लिखूं*, _ _*या गोकुल का पलना लिखूं*।_ _*देवकी की गोदी लिखूं*, _ _*या यशोदा का ललना लिखूं* ।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित, चाहे जितना लिखूं*..._ _*गोपियों का प्रिय लिखूं*, _ _*या राधा का प्रियतम लिखूं*।_ _*रुक्मणि का श्री लिखूं* _*या सत्यभामा का श्रीतम लिखूं*।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित* *चाहे जितना लिखूं*..._ _*देवकी का नंदन लिखूं*, _ _*या यशोदा का लाल लिखूं*।_ _*वासुदेव का तनय लिखूं*, _ _*या नंद का गोपाल लिखूं*।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित, चाहे जितना लिखूं*..._ _*नदियों-सा बहता लिखूं*, _ _*या सागर-सा गहरा लिखूं*।_ _*झरनों-सा झरता लिखूं*_, _*या प्रकृति का चेहरा लिखूं*।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे, जितना लिखूं*..._ _*आत्मतत्व चिंतन लिखूं*, _ _*या प्राणेश्वर परमात्मा लिखूं*।_ _*स्थिर चित्त योगी लिखूं*, _ _*या यताति सर्वात्मा लिखूं*।।_ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित, चाहे जितना लिखूं*..._ _*कृष्ण तुम पर क्या लिखूं, कितना लिखूं*..._ _*रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित, चाहे जितना लिखूं*_ _*सभी को अखण्ड ब्रह्मांड के नायक कृष्ण-कन्हैया के जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं*_ 🙏🙏💐💐🌹🌹🙏🙏 www.gulatitextorium.com
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